कृषि वैज्ञानिक ने बताया गेहूं में पीलापन दूर करने का सबसे सही तगड़ा तरीका, आंखे खुल जायेगी अंदर की राज खोल दिए !

गेहूं की फसल में पहली सिंचाई के बाद पीलापन की समस्या क्यों आती है या बढ़ जाती है। गेहूं में पीलापन किस खाद की कमी होने के कारण आता है क्या – क्या लक्षण होते है। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा के गेहूं और जौ के कृषि वैज्ञानिक Dr. OP Bishnoi जी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के माध्यम से किसानों को बहुत अच्छी जानकारी दी है। इन्होंने ऐसी – ऐसी बातें बताई जिन्हे जान कर आपकी आंखे खुल जाएंगी।

इस लेख को पढ़ने के बाद अवश्य ही आप को यह समझ आ जाएगा की आपकी गेहूं की फसल में आखिर क्यों पीलापन आया है और पीलापन को खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए कौन-सी खाद डालनी चाहिए ताकि जल्द से जल्द पीलापन दूर हो सके।

गेहूं में पीलापन क्यों आता है ?

गेहूं की फसल में पीलापन आने के कई कारण हो सकते है आइए जानते उन सभी कारणों को, और ऐसी जानकारियां पाने के लिए आप हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ सकते है।

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गेहूं में पहली सिंचाई के बाद पीलापन

गेहूं की फसल में पहली सिंचाई करने के बाद अक्सर पीलपन की शिकायत अधिक देखने को मिलती है इसका मुख्य कारण यह की किसान गेहूं और धान की फसल चक्र में, गेहूं की बिजाई के समय DAP को जमीन में डाल देते है लेकिन यूरिया, जिंक नही डालते है इससे यह होता है की जब किसान धान की फसल की कटाई कर लेता है।

और उसके बाद गेहूं की फसल लगाता है, तो जो पहले से मिट्टी के अंदर धान के पौधो के अवशिष्ट या पराली बची होती है उन्हें गलने के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है गेहूं की बिजाई के समय यूरिया ना देने पर धान के अवशिष्ट मिट्टी में उपलब्ध नाइट्रोजन को ग्रहण कर लेते है जिससे मिट्टी में गेहूं के पौधो के लिए नाइट्रोजन की कमी हो जाती है।

और गेहूं के पौधो के पत्ते पीले होने लगते है इस लिए गेहूं की बिजाई के समय बेसल डोज के रूप में DAP के साथ में लगभग एक बैग यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से देना चाहिए। और इसके साथ ही जिंक सल्फेट 10 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डालना चाहिए। ऐसा करते है तो पहली सिंचाई के बाद फसल में पीलापन की समस्या नही आयेगी। और शुरुवात से ही पौधे का अच्छा विकास होने से फसल का उत्पादन भी तगड़ा होगा।

गेहूं की फसल में पीलापन के कारणों की पहचान और उपचार

गेहूं की फसल में पीलापन की समस्या किस पोषक तत्वों की कमी के कारण आई है इसकी पहचान करने के निम्न तीन तरीके है –

पौधे के सबसे नीचे वाले पत्तों का पीला होना

यदि आपके खेत में सभी पौधों के सबसे नीचे वाले पत्ते पीले दिखाई दे रहे है इसका अर्थ है की पौधे में नाइट्रोजन की कमी हो गई है नाइट्रोजन की कमी होने कारण ऐसा लक्षण दिखाई देता है। ऐसे में खेत में यूरिया डाले या यूरिया का छिड़काव भी कर सकते है। जिससे बहुत जल्द पौधो को नाइट्रोजन की पूर्ति होगी।

तीसरी पत्ती में पीलापन आना

पौधे में जब तीसरी पत्ती निकलती है और पत्ती के बिच में पीलापन होता है यह जिंक की कमी के कारण होता है। तो जिंक की कमी को दूर करने के लिए 500 ग्राम जिंक सल्फेट लेकर 100 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव कर देना चाहिए। इससे जिंक और सल्फर दोनो की पूर्ति हो जाती है।

पोटाश की कमी के पीलापन का होना

यदि आपने जिंक, सल्फर, फास्फोरस, नाइट्रोजन सब डाल रखा है फिर भी फसल में पीलपन दिखाई दे रहा है इसका अर्थ की पौधे में पोटाश की कमी हो गई है ऐसा तभी होता है जब गेहूं की फसल से पहले की फसल में पोटाश का डोज ना दिया गया हो।

तो पोटाश की कमी को दूर करने के लिए जो पोटाश जमीन में डालते है उसी पोटाश को 1 किलो मात्रा में 100 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव कर दे। इससे पोटाश की कमी खड़ी फसल में भी पूरी की जा सकती है।

पौधे के पत्तियों की ऊपरी नोक का पीला होना

कम तापमान होने पर पौधा मिट्टी से पोषक तत्वों को ग्रहण नही कर पाता है जिस कारण पत्तियों की नोक पीली होने लगती है। इसमें आयरन की कमी से पत्तियों की नोक पर पीलपन हो जाना, मैग्निज की कमी कारण पत्तियों के नोक और किनारे पर पीलपन होने लगता है। कई बार जिंक की कमी के कारण भी पत्तियों के नोक पर पीलापन दिखाई देने लगता है।

इसके अलावा पत्तियों के नोक और किनारे जलना शुरू हो जाते है इसका मुख्य कारण जिस बोरबेल से फसल की सिंचाई हो रही है उसका पानी नमकीन या खारा है या खेत की मिट्टी में नमक अधिक होने से यह समस्या देखने को मिलती है।

उपचार : तो इस समस्या के निवारण के लिए फेरस सल्फेट 500 ग्राम से 1 किलो तक की मात्रा लेकर 100 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकड़ के हिसाब से फसल में स्प्रे करने से यह समस्या दूर हो जाएगी।

फेरस सल्फेट पंसारी के दुकान पर हरा कसीस के नाम से मिल जाएगा। पत्थर के जैसा होता है खरीद कर लाए तोड़ कर पानी में घोल कर छिड़काव कर दे।

यह भी पढ़े –

पौधे में हरेपन की कमी

गेहूं की फसल में पौधे में हरापन की कमी होने पर पौधे में पीलापन की शिकायत नही होती है लेकिन पौधे में चमक होती है पौधा हल्का हल्का सफेद देखने में लगता है। ऐसा पौधे में मैग्निज की कमी के कारण होता है। और जिस समय पौधे में बालियां निकलती है यदि उस समय मैग्निज की कमी हो जाए तो पौधे का झंडा पत्ता बाली को निकलने नही देता है।

झंडा पत्ता गहरे हरे रंग का हो जाता है और एक दम रोल हो कर सुई की तरह हो जाता है बालियों को निकलने नही देता है।

उपचार : ऐसे समय में पौधे में मैग्निज की पूर्ति करने के लिए मैग्निज सल्फेट (MNso4) 500 ग्राम 100 लीटर पानी में घोल कर प्रति एकड़ छिड़काव करने पर यह समस्या भी सही हो जाती है।

ध्यान देने योग्य बातें

ध्यान रहे किसान भाई जिंक और यूरिया का छिड़काव एक साथ कर सकते है लेकिन फेरस सल्फेट अकेले छिड़काव करना चाहिए, मैग्निज सल्फेट अकेले करना चाहिए। और जब पौधे में बालियां निकल रही हो उस समय पर खाद नही डालनी चाहिए स्प्रे करना चाहिए।

Disclaimer : todaymandibhav.com वेबसाइट पर उपलब्ध करवाए गए सभी मंडी भाव कृषि चैनल व एजी मार्केट के भावो पर आधारित है, कृपया अपनी फसल को बेचने व खरीदने से पहले अपने पास की मंडी में फसल के भाव जांच अवश्य करे नोट - लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध भरोसेमंद स्रोतों तथा किसानों के निजी अनुभव पर आधारित है किसी भी जानकारी को प्रयोग में लाने से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह अवश्य ले।
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